JAHAZ MAHAL - A BEAUTIFUL PAINTING OF ARCHITECTURE ON NATURE'S CANVAS

JAHAZ MAHAL ( A BEAUTIFUL PAINTING OF ARCHITECTURE ON  NATURE'S CANVAS )

Jahaz Mahal Mandu
Jahaz Mahal Mandu
The Jahaz Mahal is also known as "The Ship Palace" because of its similar structure, it is one of the most famous buildings in Mandu. The spectacular sunset spot here overlooks the valley below. It is famous for the mythological and tragic romantic story of the Mandu ruler Baz Bahadur, who had to run away from Akbar's advance troops and the beautiful Hindu singer Roopmati.
It is among the most unique monuments of India. When you look at the palace, it looks like a beautifully painted picture on Mandav's canvas. A palace like this cannot be seen anywhere else. Situated between Kapoor and Munj Sagar Talab, it seems like a grand ship anchored in deep seas. On a rainy day, the beauty and artistry here is at its prime. This palace is believed to have been built under Ghiyasuddin Khilji in the 15th century for his 15.000 queens. The architecture is Apparently inspired by Hindu Style.  The height of this building is 121 meters and the width is 15.2 meters. There are three huge rooms on the lower floor with a corridor connecting them. A bathing pool was built nearby for the queens. Behind the rooms, there is a huge pavilion, from here one gets a beautiful view of the Munj Sagar Talab.

Architecture

Jahaz Mahal Mandu
Jahaz Mahal Mandu
There is an artistic and beautiful staircase, inspired by a ship's stairs, that lead to the upper floor. The building is in the image of a ship. There are big pavilions and rooms on both sides of the first floor. The terrace is 62 meters long and 14 meters wide. Both the floors have lotus-shaped pools that were filled with the help of Rehat technology. Each pool has a capacity of 30,000 litres. This is the only building in Mandav the walls of which were plastered. While the other buildings in Mandav were made with lime, mortar and stone powder, this building was made by clamping iron and stones It is said that Ghiyasuddin Khilji settled a complete city in this palace. People were trained in singing, reciting. dance, swimming and wrestling here. The complete management of the palace was under women who were paid in money and grain. 

जहाज महल ( प्रकृति के कैनवास पर वास्तुकला की खूबसूरत चित्रकारी )

Jahaz Mahal Mandu
Jahaz Mahal Mandu
जहाज महल को "द शिप पैलेस " के रूप में भी जाना जाता है क्योंकि इसकी संरचना इसी तरह की है , यह मांडू की सबसे प्रसिद्ध इमारतों में से एक है।  यहाँ शानदार सूर्यास्त स्थान नीचे घाटी को देखता है। यह मांडू शासक बाज बहादुर की पौराणिक और दुखद रोमांटिक कहानी के लिए प्रसिद्ध है जिसे अकबर की अग्रिम टुकड़ियों और सुंदर हिंदू गायक रूपमती से भागना पड़ा था।

भारत की सबसे नायाब इमारतों में से एक माण्डव का जहाज़ महल है। इसे देखकर ऐसा लगता है जैसे किसी कवि ने माण्डव के कैनवास पर प्रेम की कोई कविता रची हुई हो। कपूर और मुंज सागर तालाब के बीच निर्मित यह इमारत गहरे समुद्र में लंगर डाले, किसी विशाल जहाज़ सा प्रतीत होता है। इस तरह की कोई इमारत कहीं
और देखने को नहीं मिलती। बारिश के दिनों में इसकी सुंदरता और कलात्मकता अपने चरम पर होती है। यह माना जाता है कि इस खूबसूरत इमारत का निर्माण 15वीं सदी में सुल्तान गयासुद्दीन खिलजी ने अपने हरम की 15 हज़ार बेगमों के लिए करवाया था। जहाज़ महल के स्थापत्य और शिल्प पर हिन्दू प्रभाव स्पष्ट नज़र आता है।

आर्किटेक्चर

Jahaz Mahal Mandu
Jahaz Mahal Mandu
इस दो मंजिला इमारत की लम्बाई 121 मीटर और चौड़ाई 15.2 मीटर है। इसकी निचली मंज़िल में तीन विशाल कक्ष हैं, जिनके बीच में गलियारे बने हुए हैं। इनके पास बेगमों के नहाने के लिए एक कुंड बनवाया गया था। गलियारों के पास बने कमरों के पीछे विशाल मंडप बना है, जहाँ से मुंज सागर का मनमोहक दृश्य दिखाई देता है। जिस तरह जहाज़ में चढ़ने के लिए सीढ़ियां बनाई जाती है, ठीक उसी तरह इस इमारत में भी पत्थरों की कलात्मक सीढ़ियों का निर्माण किया गया है। पूरी इमारत जहाज़ के रूप में बनायी गयी है। पहली मंजिल पर दोनों तरफ विशाल मंडप और कक्ष स्थित हैं।

इसकी छत 62 मीटर लम्बी और 14 मीटर चौड़ी है। इसकी दोनों मंज़िलों में कमल आकृति का कुंड बना हुआ है, जिसमें रहट तकनीक से पानी चढ़ाया जाता था। दोनों कुंडों में करीब 30 हज़ार लीटर पानी भरा जा सकता है। यह अकेली ऐसी इमारत है, जिसकी छत और दीवारों में प्लास्टर किया गया है। जहाँ माण्डव में बनी अन्य इमारतों में चूना, गारा और ईंट के पाउडर का इस्तेमाल किया गया है, वहीं इस इमारत के निर्माण में पत्थरों को लोहे की क्लैम्पिंग कर  जोड़ा गया है। जहाज़ महल के सम्बन्ध में कहा जाता है कि 15 हज़ार बेगमों के साथ गयासुद्दीन खिलजी ने इस महल में पूरा एक शहर बसा रखा था, जिन्हें गायन, वादन, नृत्य, तैराकी और कुश्ती
का प्रशिक्षण दिया जाता था। महल की सम्पूर्ण व्यवस्था महिलाओं  हाथों में थी । प्रत्येक महिला को दो टका और दो मन अनाज, वेतन के रूप में मिलता था। 
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